Class 07 Chapter 01 इतने ऊँचे उठो Itne Unche Utho - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
Book- इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है। देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा , समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की , धर्म - वेश की काले गोरे रंग - द्वेष की ज्वालाओं से जलते जग में इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है॥ नये हाथ से , वर्तमान का रूप सँवारो नयी तूलिका से चित्रों के रंग उभारो नये राग को नूतन स्वर दो भाषा को नूतन अक्षर दो युग की नयी मूर्ति - रचना में इतने मौलिक बनो कि जितना स्वयं सृजन है॥ लो अतीत से उतना ही जितना पोषक है जीर्ण - शीर्ण...
Chapter 10 th q .ans ki pdf nhi khul rhi h
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